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" सूरज के तेवर "

🌞🌞🌞🌞सूरज 🌞🌞🌞🌞 सूरज दादा  हमें  बताओ , इतना गुस्सा क्यों करते हो। जीव- जन्तु और पेड़, परिन्दा , सबका जीना दूभर  करते हो।। नदी, तालाब, झील- झरना को, तुम  ही  खूब  तरसाते हो । पर्वत ,घाटी  या  धरती को , आकर तुम ही  जलाते हो। बेचैन देखकर हम सबको , जी भर आनन्द मनाते हो। क्या कसूर  नन्हे पौधों का, हंसकर समूल  मिटाते हो।। पत्ते  बेचारे  मारे - मारे , तुम ही उन्हें तड़पाते हो। सारा जीवन अस्त -व्यस्त , जहाँ भी वीरान बनाते हो।। आग बरसाते अंगारों - सी, चलना भी मुश्किल  करते हो ।। रूप भयंकर अपना बनाकर,  पवन को भी  धमकाते हो ।। निरीह बेचारे भोले-भाले कई, उन पर भी कहर बरसाते हो।। पता करो उन, गद्दारों का  तुम, चुन - चुन उन्हें जला सकते हो ।।                          सुरेश कुमार                           सिवनी मप्र  आने वाली बरसात में "पेड़-पौधे" जरुर लगाइए। " प्रकृति बचाइए, जीव...