संवेदना-
एक गाँव के पास एक विशाल आम का पेड़ था। वह लगभग सैकड़ों वर्ष पुराना था। तना बहुत मोटा हो चुका था और सघन डालियाँ विस्तृत क्षेत्र में फैली हुई जो फलों से लद चुकी थीं। गर्मी का समय था, फल पकने लगे थे। विभिन्न पक्षी, तोता एवं अन्य छोटे जीवों का आवास था। सब खुशी से रहते और फल खाते थे। आमदादा भी बहुत खुश रहते थे, सबको खुश देख-देखकर, लेकिन एक दिन उनको उदासी ने घेर लिया और वे निराशा में डूब गए। उनके पास ही कांटेदार झाड़ियाँ भी उनकी छत्रछाया और सहारे में पल-बढ़ रहीं थीं। उन्होंने एक दिन गौर कर ही लिया और पूंछ ही बैठीं- आमदादा! आज इतने उदास क्यों हो? क्या परेशानी हो गयी? आप तो बहुत शक्तिशाली, संपन्न और महान हो, फिर भी आपको बेचैनी कैसी? हमको बहुत द...