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" सूरज के तेवर "
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🌞🌞🌞🌞सूरज 🌞🌞🌞🌞 सूरज दादा हमें बताओ , इतना गुस्सा क्यों करते हो। जीव- जन्तु और पेड़, परिन्दा , सबका जीना दूभर करते हो।। नदी, तालाब, झील- झरना को, तुम ही खूब तरसाते हो । पर्वत ,घाटी या धरती को , आकर तुम ही जलाते हो। बेचैन देखकर हम सबको , जी भर आनन्द मनाते हो। क्या कसूर नन्हे पौधों का, हंसकर समूल मिटाते हो।। पत्ते बेचारे मारे - मारे , तुम ही उन्हें तड़पाते हो। सारा जीवन अस्त -व्यस्त , जहाँ भी वीरान बनाते हो।। आग बरसाते अंगारों - सी, चलना भी मुश्किल करते हो ।। रूप भयंकर अपना बनाकर, पवन को भी धमकाते हो ।। निरीह बेचारे भोले-भाले कई, उन पर भी कहर बरसाते हो।। पता करो उन, गद्दारों का तुम, चुन - चुन उन्हें जला सकते हो ।। सुरेश कुमार सिवनी मप्र आने वाली बरसात में "पेड़-पौधे" जरुर लगाइए। " प्रकृति बचाइए, जीव...
' मन का दिया '
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1- जलाओ दिया, एक और भी अभी मन का , न रहे किसी कोने में, कोई तम भी तन के । झांकता है दिल तोड़कर,कभी भी अपनेपन का , जलाओ चिराग, आज छिटके उजाला बनके ।। 2-न दुखाये मन कभी भी, कोई किसी तन का, अफ़सोस न गढ़ जाए, अपने वास्ते चलके। आज दिया बनाओ , अपना ही ये तन का , कुछ जलाओ नया, जो दमके मशाल बनके।। 3-चमके अमावस रात में,जग-जग, जग-जन का, जाला न रह जाए , किसी कोने में आज मन के। झड़ा लो खूब आज, फंसा न रहे कुछ मन का , बना लो सब कुछ ऐसा, जो तारा-सा चमके ।। 4-चहुं ओर चंद्र-सा बनकर ,आज ये मन का, मिटा दे कलुष, कपट, ज्योति-सा जलके । जग-जीवन जगा दे, आज सोए हुए जन का, हट जाए अंधेरा , अभी जो छाया है मन के ।। _______सुरेश कुमार , सिवनी (मप्र)________